क्रिकेट में बुरा देखा कहाँ है, आज अगर बॉथम, मियांदाद लिली

वगैरह होते तो आप गाली दे रहे होते।

मैं इससे औऱ पुरानी बात बताता हूँ, "फ़ायर इन बेबिलोन"

देखिएगा, जब वेस्टइंडीज़ की टीम लॉयड की कप्तानी में

ऑस्ट्रेलिया गई तो वहां के दर्शक उन्हें किसी जानवर की तरह

देख रहे थे ग्राउंड उन्हें रोम का एरीना लग रहा था।

दर्शक उन्हें बन्दर, चिंपैंजी बुला रहे थे। कुछ दर्शक यहाँ तक

उनपर सामान फेंक कर कहते थे जाओ पेड़ो पर लौट जाओ,

जंगलियों। ये वाक़ई कितना बुरा था, बड़े से बड़ा प्लेयर

मानसिक रूप से टूट सकता था।

वेस्टइंडीज टीम बहुत कमज़ोर थी। ऑस्ट्रेलिया के तेज़ बॉलर

उन्हें घायल कर रहे थे। 

एक टेस्ट में तो 8 बैट्समैन घायल हो गए। उनके बॉलर्स प्लेयर

के पास आँखों में आँख डालकर कहते की तुम्हे मैं ग्राउंड पर

मार डालूँगा। वेस्टइंडीज़ टीम बुरी तरह घायल और हारकर

अपने देश लौट गई। उनका हर खिलाड़ी शर्मिंदा था लेकिन इस

तरह के व्यवहार और ऐसी निगेटिव बॉलिंग का उन्होंने रोना

नही रोया, भावनाएं आपको कमज़ोर बनाती है।

इतने बुरे वक्त के बाद भी उनके कप्तान के इरादे मज़बूत थे

उसने वेस्टइंडीज के हर आइलैंड से तेज़ गेंदबाज़ ढूँढने की

कोशिश की। 

माइकल होल्डिंग को रेत पर फेंकते हुए देखा। रोबर्ट्स को गाँव

से ढूँढा। कुछ महीनों में बॉलरो की शानदार तिकड़ी तैयार कर

दी।


अगला दौरा इंग्लैंड का था। इंग्लैंड के कैप्टेन ने एक बेहद

घटिया इंटरव्यू दिया शायद उसने कहा था की इन जंगलियों को

सबक सिखा देंगे। 

ये बात वेस्टइंडीज के खिलाड़ियों के आत्मसम्मान पर आघात

जैसी थी। उसके बाद आपको पता ही होगा की वेस्टइंडीज ने

इंग्लैंड का क्या हाल किया। हर खिलाड़ी पिच पर खून गिराता

जा रहा था। 

वेस्टइंडीज़ वो टीम बन गई कि दशको क्रिकेट में दबदबा कायम

रखा। 

श्रीलंका को ये सोचना चाहिए कि एक महीने में दो बार 50 रन

बनाए है, अपनी क्रिकेट पर ध्यान दें, ख़ासकर मैथ्यूज़ को

समझना चाहिये ग़लत साकिब नही वो ख़ुद है, आपको

डगआउट में तैयार होकर बैठना होता है, अपनी किट को पूरी

तरह चेक करके यहां तक हेलमेट का स्ट्रैप बाँधे हुए।

आप जब कोई पेपर देने जाते है और कहते है कि एडमिट कार्ड

गिर गया तो एग्ज़ाम नही देने दिया जाता भले आप कितना

रोना रो लें,  

श्रीलंका को अब अपनी क्रिकेट सुधारनी होगी, और जब वो

जीतेंगे तभी उन्हें जीता कहा जायेगा, बाकी ये दिल जीतना, ये

भवनाएं सब खोखली बातें हैं।

(फ़ायक़ इन मूड)

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