जीवन

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम जी कहते थे कि हम एक ऐसे समाज में रहते हैं जहां सुंदरता को उसके रंग से देखते हैं, शिक्षा को उसके मार्क्स से देखते हैं और सम्मान को उसके पैसों से देखते हैं।
एक बाहुबली अरबपति हो सकता है लेकिन वह कभी विद्वान नहीं हो सकता है। यह सच है कि कर्म ही अर्थ को हासिल करने का एक माध्यम है। और यह भी सच है कि बिना अर्थ कोई कर्म सफ़ल नहीं होता है।
बहरहाल असंख्य लोगों के जीवन में अर्थ एक माध्यम है प्रथम या अंतिम साध्य नहीं। आधुनिक औधोगिक समाज में अर्थ बिना आदर्शवादी बातें भी निष्क्रिय जरूर है लेकिन व्यर्थ नहीं।
सामंजस्य बनाकर चलने के प्रयत्न में वैचारिक सफलता एक लंबी प्रक्रिया होती है। इसलिए हर मर्ज का फर्ज है धैर्य। आवश्यकताओं के बाजार में जरूरतों की खानापूर्ति करते चलो। #
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें