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 क्रिकेट में बुरा देखा कहाँ है, आज अगर बॉथम, मियांदाद लिली वगैरह होते तो आप गाली दे रहे होते। मैं इससे औऱ पुरानी बात बताता हूँ, "फ़ायर इन बेबिलोन" देखिएगा, जब वेस्टइंडीज़ की टीम लॉयड की कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया गई तो वहां के दर्शक उन्हें किसी जानवर की तरह देख रहे थे ग्राउंड उन्हें रोम का एरीना लग रहा था। दर्शक उन्हें बन्दर, चिंपैंजी बुला रहे थे। कुछ दर्शक यहाँ तक उनपर सामान फेंक कर कहते थे जाओ पेड़ो पर लौट जाओ, जंगलियों। ये वाक़ई कितना बुरा था, बड़े से बड़ा प्लेयर मानसिक रूप से टूट सकता था। वेस्टइंडीज टीम बहुत कमज़ोर थी। ऑस्ट्रेलिया के तेज़ बॉलर उन्हें घायल कर रहे थे।  एक टेस्ट में तो 8 बैट्समैन घायल हो गए। उनके बॉलर्स प्लेयर के पास आँखों में आँख डालकर कहते की तुम्हे मैं ग्राउंड पर मार डालूँगा। वेस्टइंडीज़ टीम बुरी तरह घायल और हारकर अपने देश लौट गई। उनका हर खिलाड़ी शर्मिंदा था लेकिन इस तरह के व्यवहार और ऐसी निगेटिव बॉलिंग का उन्होंने रोना नही रोया, भावनाएं आपको कमज़ोर बनाती है। इतने बुरे वक्त के बाद भी उनके कप्तान के इरादे मज़बूत थे उसने वेस्टइंडीज के हर आइलैंड से तेज़ गेंदबाज़ ढूँढने की को...

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